इस स्कूल के छात्राओं को शौच के लिए खटखटाना पड़ता है बगल...

इस स्कूल के छात्राओं को शौच के लिए खटखटाना पड़ता है बगल के घरों का दरवाजा

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campusjosh.in

बिहार के दरभंगा जिला मुख्यालय से महज 2 किलोमीटर की दूरी पर स्थित बहादुरपुर प्रखंड के डरहार गांव में 23 पंचायत का इकलौता +2 बालिका उच्च विद्यालय, जहां आज भी छात्राओं को शौच के लिए स्कूल के बगल के घरों में जाना पड़ता है.

वजह है स्कूल में एक अदद शौचालय का अभाव. यूं कहें तो स्कूल आज उधार की शौचालय और ग्रामीणों की मेहरबानी के बदौलत चल रहा है.

स्कूल में शौचालय नहीं होना सरकार और शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करता है. स्कूल प्रशासन से लेकर ग्रामीणों ने स्कूल में शौचालय निर्माण के लिए प्रयास जरूर किया, लेकिन सफलता हाथ नहीं लगी.

प्रधनमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा स्वच्छता अभियान के तहत नॉमिनेट किए गए स्वामी राम भद्राचार्य ने जिस दिन डरहार गांव से स्वच्छता अभियान की शुरुआत की तो उस दिन मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री उपेंद्र कुशवाहा ने भी गांव में झाड़ू लगाया था.

स्कूल में शौचालय नहीं होने की वजह से हो रही परेशानी से भी उन्हें रू-ब-रू करवाया गया. उस दिन मंत्री ने कहा था कि यदि भीख मांगना होगा तो भीख मांगूंगा, लेकिन यहां शौचालय जरूर बनवाउंगा. तीन साल बीत जाने के बाद भी परिस्थिति में कोई बदलाव नहीं हुआ है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तर प्रदेश में स्वच्छता अभियान के तहत नौ लोगों को नॉमिनेट किया था. उनमें स्वामी राम भद्राचार्य भी शामिल थे. इसी क्रम में दरभंगा के डरहार गांव में 15 नवंबर 2014 को उन्होंने स्वच्छता अभियान की शुरुआत की. इस कार्यक्रम के दौरान मंत्री उपेंद्र कुशवाहा भी मौजूद थे.

उस दौरान जब पत्रकारों ने स्वामी भद्राचार्य से गांव के साथ-साथ स्कूल में शौचालय नहीं होने की बात कही थी तो उन्होंने मंत्री की उपस्थिति में ये वादा किया था कि यदि हमको शौचालय बनवाने के लिए भीख भी मांगनी पड़ेगी तो मांगेंगे. वहीं ग्रामीणों ने केंद्रीय मंत्री को स्कूल तक ले गए और स्कूल की दुर्दशा के साथ-साथ शौचालय नहीं होने की समस्या से अवगत करवाया. उस समय मंत्री ने जल्द विधालय में शौचालय बनवाने की बात कही थी, लेकिन तीन वर्षों के बाद भी शौचालय नहीं बना और ना ही सुरक्षा के लिए दीवार खड़ी हुई.

दूर-दूर से शिक्षा पाने की ललक में पढ़ने आने वाली छात्राओं की बात करें तो वो काफी मायूस हैं. शौचालय नहीं होने के कारण उन्हों स्कूल के अगल-बगल के घरों के दरवाजे खटखटाने पड़ते है. इससे उन घर के लोगों को भी परेशानी उठाना पड़ता है.